I am simple person, having good confidence to myself, helping nature , happiness mood,solve all problems by smiling and using simple commonsense..maintain positive environment around myself... "Always dreaming is make path of success in life . Dreaming give shape to our thinking , and thinking solve many of problems of our way of success." bhartiamanu@gmail.com
Tuesday, December 18, 2012
मैं खुद निशब्द हो जाऊं ....
“ तुमसे प्यार करके
ही पलों को शब्द देना सीखा था ,
अब कहती हो मैं तुम बिन पल जीना सीख लूँ ?
तुमसे प्यार करके ही सफल जीवन जीना सीखा था ,
अब कहती हो तुम बिन सफल रहना सीख लूँ ?
तुमसे प्यार करके ही खुद को पहचानना सीखा था ,
अब कहती हो तुम बिन विशेष
बनना सीख लूँ ?अब कहती हो मैं तुम बिन पल जीना सीख लूँ ?
तुमसे प्यार करके ही सफल जीवन जीना सीखा था ,
अब कहती हो तुम बिन सफल रहना सीख लूँ ?
तुमसे प्यार करके ही खुद को पहचानना सीखा था ,
तुमसे प्यार करके ही निशब्द को शब्द देना सीखा था ,
अब कहती हो तुम कि मैं खुद निशब्द हो जाऊँ ? “
Tuesday, August 2, 2011
क्या मैं इस लायक था !
वो मझधार ही थी न जिसमे तुमने मुझे छोड़ा था ,
इतना तो सोच लेती मैं कैसे उससे पार आता ?
वो अदा ही थी न जिसमे तुमने मुझे तोडा था ,
इतना तो सोच लेती मैं कैसे खुद को जोड़ता ?
वो बेवफाई ही थी न जिसके भरोसे मुझे छोड़ा था ,
इतना तो सोच लेती मैं उसे सह सकता था ?
वो निर्दई तुम ही थी न जिसने मेरा प्यार ठुकराया था ,
इतना तो सोच लेती क्या किसी और से कर पाता ?
वो बेदर्द तुम ही थी न जिसने मुझे दर्दीला बनाया था ,
इतना तो सोच लेती क्या मैं इस लायक था ?
........ मनु .....
इतना तो सोच लेती मैं कैसे उससे पार आता ?
वो अदा ही थी न जिसमे तुमने मुझे तोडा था ,
इतना तो सोच लेती मैं कैसे खुद को जोड़ता ?
वो बेवफाई ही थी न जिसके भरोसे मुझे छोड़ा था ,
इतना तो सोच लेती मैं उसे सह सकता था ?
वो निर्दई तुम ही थी न जिसने मेरा प्यार ठुकराया था ,
इतना तो सोच लेती क्या किसी और से कर पाता ?
वो बेदर्द तुम ही थी न जिसने मुझे दर्दीला बनाया था ,
इतना तो सोच लेती क्या मैं इस लायक था ?
........ मनु .....
पूछो न उस कागज़ से ,
पूछो न उस कागज़ से ,
जिस पर हम ख्वाब लिखते है !
पूछो न उस कागज़ से ,
तनहाइयों की बाते लिखते हैं !
पूछो न उस कागज़ से ,
नाम तेरा बार बार लिखते हैं !
पूछो न उस कागज़ से ,
जिसपे तेरा इंतजार लिखते हैं !
पूछो न उस कागज़ से ,
तेरे वादों की उम्मीद लिखते हैं !
पूछो न उस कागज़ से ,
तुम लौट आओगी लिखते हैं !
पूछो न उस कागज़ से ,
तुम मुझे प्यार दोगी लिखते हैं !
पूछो न उस कागज़ से ,
सदा साथ मेरे रहोगी लिखतें हैं !
पूछो न उस कागज़ से ,
उस कागज़ को न खोओगी लिखते हैं !
............... मनु ....................
जिस पर हम ख्वाब लिखते है !
पूछो न उस कागज़ से ,
तनहाइयों की बाते लिखते हैं !
पूछो न उस कागज़ से ,
नाम तेरा बार बार लिखते हैं !
पूछो न उस कागज़ से ,
जिसपे तेरा इंतजार लिखते हैं !
पूछो न उस कागज़ से ,
तेरे वादों की उम्मीद लिखते हैं !
पूछो न उस कागज़ से ,
तुम लौट आओगी लिखते हैं !
पूछो न उस कागज़ से ,
तुम मुझे प्यार दोगी लिखते हैं !
पूछो न उस कागज़ से ,
सदा साथ मेरे रहोगी लिखतें हैं !
पूछो न उस कागज़ से ,
उस कागज़ को न खोओगी लिखते हैं !
............... मनु ....................
Thursday, July 28, 2011
विचलित मन
मन विचलित होता है अब तो मेरा भी ,
जब तुम्हारा विश्वास डगमगाने लगता है !
मन घबराने लगता है अब तो मेरा भी ,
जब तुम्हारा मन खामोश होने लगता है !
मन टूटने सा लगता है अब तो मेरा भी ,
जब तुम्हारा मन तुमसे दूर होने लगता है !
मन उदास सा होता है अब तो मेरा भी ,
जब तुम्हारा प्यार कभी चुप होने लगता है !
मन अपनापा खोता है अब तो मेरा भी ,
जब तुम्हारा मन मुझसे दूर होने लगता है !
जब तुम्हारा विश्वास डगमगाने लगता है !
मन घबराने लगता है अब तो मेरा भी ,
जब तुम्हारा मन खामोश होने लगता है !
मन टूटने सा लगता है अब तो मेरा भी ,
जब तुम्हारा मन तुमसे दूर होने लगता है !
मन उदास सा होता है अब तो मेरा भी ,
जब तुम्हारा प्यार कभी चुप होने लगता है !
मन अपनापा खोता है अब तो मेरा भी ,
जब तुम्हारा मन मुझसे दूर होने लगता है !
Wednesday, July 20, 2011
मेरे अपने से आंसूं
मेरे दिल में दबे से तुम्हारे प्यार के अहसास -
मानो बरखा की बूंदों के साथ मुझे भिगो जाते हैं !
मेरे दिल में दबे मेरे प्यार कुछ अरमान ,
मानो भीगे से फूलो की महक से महकते हैं !
मेरे दिल में दबे से रातभर जागने का अहसास ,
मानों मेरे सपनो में सच सा होने लगता है !
मेरे दिल में दबे से मेरे कुछ अनुतरित प्रश्न ,
मानों तुम्हारी बेवफाई से उत्तर पा जातें हैं !
मेरे दिल में दबे से जीवन के कुछ रंग ,
मानों तुम्हारे दूर जाने से बदरंग हो जाते हैं !
मेरे दिल में दबे से मेरे अपने से आंसूं ,
मानों अपने आप शब्द बन तुम्हे याद करते हैं !
मानो बरखा की बूंदों के साथ मुझे भिगो जाते हैं !
मेरे दिल में दबे मेरे प्यार कुछ अरमान ,
मानो भीगे से फूलो की महक से महकते हैं !
मेरे दिल में दबे से रातभर जागने का अहसास ,
मानों मेरे सपनो में सच सा होने लगता है !
मेरे दिल में दबे से मेरे कुछ अनुतरित प्रश्न ,
मानों तुम्हारी बेवफाई से उत्तर पा जातें हैं !
मेरे दिल में दबे से जीवन के कुछ रंग ,
मानों तुम्हारे दूर जाने से बदरंग हो जाते हैं !
मेरे दिल में दबे से मेरे अपने से आंसूं ,
मानों अपने आप शब्द बन तुम्हे याद करते हैं !
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