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Tuesday, March 15, 2011

वृक्षों का होना हमारा जीवन

मित्रो , हमे पेड़ों की न केवल रक्षा करनी चाहिए बल्कि उन्हें कटने से बचाना भी चाहिए ! हमारे कुछ सुझाव आपके सामने प्रस्तुत हैं ..यदि अच्छे लगे तो ठीक नहीं लगें तो भी ठीक ..! क्योंकि मर्जी आपकी है !
* अपने घरों के आस -पास जहाँ भी पेड़ लगें हों , अपने अत्यंत व्यस्त समय में से कुछ समय उन्हें दें ..उन्हें पानी दें ..उनके आस -पास कोई भी गन्दगी होने से रोकें !
* अपने घरों में यदि थोडा सा भी स्थान है तो गमलों में अपनी पसंद के पौधे लगायें और उनकी उसी तरह देखभाल करें जैसे आप अपने प्रिय की करतें हैं !
* अपने घरों में अपनी पसंद के आलावा -'पीपल , अशोक , या ऐसे ही पेड़ गमलों में लगायें फिर कुछ वर्षों बाद अपने गावं , शहर से दूर ऐसी सुरक्षित जगह चुने जहाँ इन्हें फिर से लगायें तो सुरक्षित अपनी वृद्धि वे पेड़ कर सकें ! साथ ही जब कभी उस स्थल से गुजरे देखें ....!
* कोई भी वृक्ष कटे उसका खुल कर विरोध करें , स्थानीय प्रशासन , समाचार पत्र , वन विभाग को लिखित सूचना देते हुए न काटने का निवेदन करें !
* अपने किसी भी त्यौहार पर पेड़ों का सम्मान करके त्यौहार की शुरुआत करें !
* प्रयास करें जो भी ऐसा कम आपके आस पास कर रहें हों उनका उत्साह बढ़ाएं ..!
यदि इन बातों के आलावा आपके मन में कोई विचार आये तो उस पर अमल करें ..यदि हमने ऐसा नहीं किया तो वो समय दूर नहीं ..जब इस पोस्ट के साथ जो चित्र हम लगा रहें हैं वो सच हो जाये ..! यदि ऐसा हुआ तो सोचिये हमारा क्या होगा ...?

पत्थरों पर सजीव कलाकारी



" कलाकार सही में इतनी प्रतिभा रखता है कि वो निर्जीव में भी जान डाल दे !" जितनी भी प्रशंसा की जाये लगता है कम ही की ..! कोई भी विशेषता यदि हममे है तो हमे अन्य से विशेष बना देती है न..! और इस विशेषता की जान होती है सरलता , सादगी ..! चाहे कलाकार हो या कवि वो केवल इस बात की कल्पना में रहता है कि उसकी कल्पना साकार कैसे हो ? इसमें वो डूबा रहता है और जब उसकी कल्पना साकार होती है , तो उसे इतनी मन की शांति मिलती है की उसे केवल वाही महसूस कर पाता है ! सच ऐसे कलाकारों को मन न केवल हम चाहतें है बल्कि मन ही मन ईश्वर से प्रार्थना भी करतें हैं न कि -ये कलाकार और भी अच्छी कल्पना करे और हमारे मन को ख़ुशी देता रहे .! ...सही है न ये ..तो देखिये इस संग्रह में ..कलाकार ने ' बेजान से छोटे -छोटे पत्थरों के टुकड़ों को अपनी कला से कितना सजीव कर दिया है !" ...उम्मीद है आप सबको पसंद आएगा ...!!!

होली के रंग - प्यार और खुशियों के संग

" होली " ..! एक ऐसा त्यौहार ...जिसमे रंगों के सयोंजन से दिल की प्रसन्नता व्यक्त की जाती है ..मन में उठी उमंग हिलोरें लेती है ...ऐसा लगता है मानों चारों तरफ ..मन की खुशिया तरह -तरह के रंगों में रगीन हो कर नृत्य कर रहीं हो ..! क्या छोटा क्या बड़ा ...क्या अमीर क्या गरीब ..सब अपने मन की ख़ुशी ..को खुल कर व्यक्त करतें हैं ! यही एकमात्र त्यौहार है जिसे हमने मानना शुरू किया और धीरे धीरे सारी दुनिया ने अपने अपने ढंग से मानना शुरू किया ! सच में " होली के रंग भर देतें हैं मन की खुशियों में ऐसा रंग ..जिसे हर कोई अपने संग रखना चाहता है !
हाँ हमे इस त्यौहार में इस बात का जरूर ध्यान रखना चाहिए कि " कोई मर्यादा की सीमा हम न लांघे ! ऐसी कोई हरकत न करें जिससे किसी के मन को कोई ठेस पहुंचे ! " अब क्या है न जिनके दिलों में उत्साह न हो ख़ुशी व्यक्त करने या देखने की आदत न हो तो उसे खुसी देनी भी नहीं चाहिए न ..! बस इस बात को मन में रखते हुए ..डूबें रहें रंगों के सागर में ...रंगों में महकती खुशियों में ...रंगों के उस अनंत दुनियां में ..! जिसमे केवल ख़ुशी होती है ..कोई रंज नहीं ..कोई दुर्भाव नहीं ...कोई अंतर नहीं ..! सब एक जैसे लगतें हैं ...रंगों में रंगे हुए ..! इसलिए भगवान की ये बात यहाँ साकार होती सी लगती हैं --- " सब एक हैं अपनी अपनी खुशियों के रंगों में रंगे हुए ..! "
हम अपने सभी मित्रों को ....अपने इन शब्दों के रंगों से रंगते हुए उन्हें एवं उनके सभी परिजनों को , और जो अपना परिवार बनाने की " प्रोसेस " में हैं ..और जिनका नया नया परिवार बना है सभी को " होली " की रंगीन शुभकामनायें देतें हैं ..! साथ ही यदि हमसे कभी कोई भी ऐसी भूल हो गई हो जिससे आपके दिल को जरा सी भी ठेस लगी हो तो इस रंगों के त्यौहार में हँसते - मुस्कुराते ..हमे क्षमा कर दीजियेगा ..और अपनी पसंद का रंग मन में लगाने का सोच लीजियेगा ..हमे आपके प्यार का ऐसा रंग लग जायेगा ...जो हमे जीवन भर खुशियाँ देता रहेगा ....! " होली है .....!"

Monday, March 14, 2011

मानव जीवन में - 'गंगा , गाय और पीपल ' की महता !

#" गंगा " ..! जैसे मानव शरीर होता हैं , जो हर कठिनाई , दुख तकलीफ ...अपमान ..असहयोग ...असफलताएं ..आदि अनचाहे पलों को अपने में समाहित कर उन्हें अपने आत्मविश्वास रूपी गुणों से पवित्र , निर्मल बना अपना जीवन निर्बाध जीता चला जाता है ..! यही विशेषता है " गंगा " में भी न ...!
#" गाय " ..! जैसे मानव मन बचपन से अपनी उम्र के अंतिम पड़ाव तक अपने परिवार की सेवा करता चला जाता है या कहें अपना कर्तव्य निभाता चला जाता है ..और उफ़ तक नहीं करता ..किसी के कोई अपेक्षा करता भी है और पूरी न हो तो ये सोच कर मन शांत रखता है कि " परिवार है न " ! यही विशेषता होती है " गाय "में भी न ...वह भी किसी से कोई अपेक्षा नहीं रखती और जो प्यार देता है उसे याद रखती है ..और अपने दूध से सभी का पालन करती है न ..!
#" पीपल " ..! जैसे मानव अपने परिवार रूपी वृक्ष में आनंदित रहता है अपने दुख - दर्द भी भूल जाता है ..! ठीक वैसे " पीपल ' भी होता है न अपनी विशाल काया में हर उसको अपने आँचल की छाया देता है कि वह अपनी साडी थकान तक भूल जाता है ..!
अब जब ऐसा है तो हमें इनका वैसा ही सम्मान और देखभाल करनी चाहिए न जैसे हम अपनी स्वयं कि करतें हैं ,,! तो यदि आप इन शब्दों से थोडा सा सहमत होंगे तो अपने स्तर पर इन्हें भी ' ऐसा ही माने जैसे आप अपने आप को मानतें हैं !" ..बस इतना ही ...! शेष फिर कभी ....!

Sunday, March 13, 2011

रहे सदाबहार वृक्ष हमेशा ..ता कि रहें मुस्कुराते हम ..!

" पेड़ ", कोई भी हो मानव जीवन के अस्तित्व का प्रतीक है ! अब इसे कहें कि ये मानव को प्राण वायु दे कर उसे जीवन देता है , अपने पत्तों कि छावं देकर उसे सूर्य कि गर्मी से बचाता है ! अपने अन्दर छुपे गुणों से मानव शरीर की सरंचना बखूबी मनाये रखने में अपने आप को समर्पित कर देता है ! यानि कुल मिला कर मन सकतें हैं कि " पेड़ " कह ले या ' वृक्ष " ..अब इसका कोई भी नाम हो ..पीपल , अशोक , नीम , कीकर , बरगद , आम , जामुन , या अन्य कोई भी ..! मानव जीवन की रक्षा , विकास , और सुविधा सम्पन्नता के लिए अपना अस्तित्व तक समर्पित कर देता है ..! चूँकि ये बोल नहीं सकता इसका ये मतलब नहीं कि ये सुन या देख नहीं सकता? हम इस गलत फहमी में रहतें है कि - ' ये पेड़ क्या सुनेंगे , कहेंगे ..? " बस जिसके मन में ये विचार आया कि उसके मन से पेड़ के प्रति भावनाएं दम तोड़ गईं ..! यहीं हम गलती कर जातें हैं ..एक ऐसी गलती जिसे सुधारने के लिए पेड़ हमे कितने अवसर देता है उसकी गिनती नहीं फिर भी हम उन अवसरों को देख नहीं पाते ! हाँ तो जब हम इन्हें समझने में गलती कर जातें है तो ..पेड़ भी सोचतें है - " चलों इन स्वार्थी मानवों को थोडा सबक सिखातें हैं ?" जहाँ पेड़ों ने ये सोचा ..कि प्रकृति ने इन्हें अवसर दिया ये कह कर कि - " मैं तुम्हारे साथ हूँ ..बस इशारा कर देना ..बाकि मैं कर लूंगी ..! " जैसे ही पेड़ इशारा करतें हैं ...कि हम " मानव झूझने लगतें है - दावानल के विकराल स्वरुप से अपने आप को बचाने में , सूखी -सी निर्जल बेजान सी धरा पर अपने क़दमों के निशान बनाने में असफल से हम मानव ...सूर्य की गर्मी से बेहाल मानव तो मानव साथ में बेचारे निर्दोष पशु -पक्षी , जिन्होंने कोई अपराध नहीं किया होता पर सजा भुगत जातें हैं ..अपने अस्तित्व का होम करके ..,नदियों का जल , वर्षा का जल , अपना ऐसा तांडव दिखता है कि हक्का -बक्का सा मानव निसहाय सा हो कर रह जाता है ..! पर क्या है न मानव अपनी लालच , स्वार्थ परक आदत , और सवेंदना शून्य से इतना ग्रसित हो गया है ..कि उसे ये सब तब तक नहीं दीखता जब तक उसके अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह न लग जाये ..! है न ...चलिए यदि इतना पढ़ लिया होगा आपने ..तो कुछ सवेंदना जगी होगी - इन पेड़ों के प्रति ..यदि ऐसा हुआ तो - धन्यवाद हमे न दीजियेगा ..धन्यवाद उन पेड़ों को दीजियेगा ...जिन्हें आपने देखा होगा ...जिन्हें पानी चाहिए था , कुछ देखभाल चाहिए थी , अपने वंश वृद्धि के लिए आपका सहयोग चाहिए था पर अनदेखा कर गए थे ..! किसी भी नाम कें पेड़ के लिए ..अपना जो भी सहयोग दें ..सौ प्रतिशत दें ....! यही धन्यवाद ज्ञापन होगा ..! जय हिंद ..! रहे सदाबहार वृक्ष हमेशा ..ता कि रहें मुस्कुराते हम ..!

Friday, March 11, 2011

" तुम्हे देखना कभी न छोडूंगा ..!"

सपनीला -सा मैं देखा करता था सपना , कब घूमूँगा देश विदेश ? कब बना पाउँगा अपने मित्र ..? कब बन पाउँगा मैं आत्मनिर्भर ..? कब कह पाउँगा  अपने देश , धर्म और भाषा की  विशेषताएं खुल कर ..? अब चूँकि मैं सपने देखता भी था साथ ही वे कैसे सच होंगे ये भी सोचता था ..क्या करूँ उनके सच होने लिए ? कैसे करूँगा ये सब ? किसकी मदद लूँ  ? ये भी सोचता था ! पर हाँ सोचता भी था और उस पर अमल भी ये सोच कर करता था कि - 'सपने तो मेरे हैं न तो मुझे ही कोशिश करनी होगी !' बस अपने आत्मविश्वास को बढाता गया और अपने काम करता गया .. हाँ समय जरूर लगा ..क्यों कि मैंने सयम भी बना कर रखा अपने में ..और आज मेरे सपने सच हो कर मुझे कहतें हैं - " देखा मुझे देखने का फायदा ..पहले क्या थे अब क्या हो ? अच्छा है न ..सब ...जैसा तुम चाहते थे वैसा हुआ न ..! " मैंने भी सपने से कहा मैं अब - " तुम्हे देखना कभी न छोडूंगा ..!"

Wednesday, March 9, 2011

सच्ची देश भक्ति

जब भारत आज़ाद हुआ तो सब लोग जश्न में व्यस्त हो गए ! एक गावं में तालाब के किनारे कुछ युवक बैठे हुए आपस में बातें कर रहे थे !
तभी एक ग्रामीण आया और उनसे बोला - " सब लोग अपनी ख़ुशी में तुम लोगों को कैसे भूल गए जब कि तुम लोगों पहले बहुत थे पर आज़ादी के लिए संघर्ष करते हुए अब इतने कम बचे हो तुम्हे तो खुश होना चाहिए न !"
उन युवकों में से एक ने कहा - " लगता है हमने कुछ गलत लोगों को कुछ ज्यादा ही महत्त्व दे दिया था अब लगता है इसके परिणाम हमे और सबको कहीं हमेशा न भुगतने पड़ें ? यही सोच रहें हैं ? "
पर उस ग्रामीण की समझ में नहीं आईं उनकी बातें , उसने केवल सर हिलाया और चला गया !
कुछ सालों बाद  ......
एक दिन वही युवक तालाब के किनारे बैठे थे तो वही ग्रामीण आया और उनसे बोला - " एक बात समझ में नहीं आई उन सबके नाम से कहीं कोई मूर्ति या समारोह नहीं हो रहा जिन्होंने आपके साथियों जैसे अपनी जान देश की स्वतंत्रता के लिए कुर्बान कर दी ? और जिन्होंने आपके जैसे कोई काम नहीं किया उनके नाम से चौक - चौराहों के नाम और मूर्तियाँ लगाई जा रहीं हैं ? ऐसा क्यों ?
उन युवकों में से एक ने अब खुश होते हुए कहा - ये तो अच्छी बात है न ...! तुम्हे हमारा नाम कहीं नहीं दिखा ?
ग्रामीण ने हैरान होते हुए कहा - नहीं ?
युवक ने हँसते हुए कहा - जय स्तम्भ में हमारे नाम लिखे हैं न पढ़ लेना ..!
फिर ग्रामीण की समझ में कुछ नहीं आया और सर हिलाते हुए चला गया !
कुछ सालों बाद फिर -
उसी स्थान पर उन्ही युवकों के सामने वही ग्रामीण कह रहा था - ' सही कहा था तुम लोगों ने ..मैंने तुम लोगों के नाम पढ़े ..मुझे अब समझ में आया ..कितने सुन्दर अक्षरों में तुम्हारे नाम लिखे हैं ..ठीक वैसे ही - ' जैसे कर्तव्य , भावना , और सत्यता दिखती नहीं है पर ये दुनिया इनके बिना अधूरी है वैसे ही आप युवक हैं ! जिनके इस तरह के काम किसी को दिखते भले न हों पर इसके बिना किसी भी देश का कोई अस्तित्व ही नहीं होगा ! मुझे गर्व है कि - मैं आपका ही एक रूप हूँ ! "
इस पर युवकों ने कहा - अब समझ में आया न - किसी भी काम को करते समय ये नहीं सोचना चाहिए - हमारा नाम होगा या नहीं , अपना काम करते जाओ बस !"
-----सच ही है न सैनिक , किसान , देश भक्त युवक , धर्म रक्षक यदि अपने नाम के लिए काम करें तो वे ये सब काम कर पाएंगे ..? नहीं न ...!!!!
(यह सच्ची घटना है - मोहन भया...)

Monday, February 28, 2011

महाशिव रात्रि

" गुरुर ब्रम्हा गुरुर विष्णु , गुरुर देवो महेश्वरा !
गुरुर साक्षात् परब्रम्हा , तस्मय श्री गुरुवे नमः !! "

शिव भोले भंडारी हैं , बस मन से उनका नाम लीजिये मन शांत हो जाता है ! मन की सारी उलझने मानों अपने आप सुलझने लग जाती हैं ..! "  ॐ नमः शिवाय ", इस छोटे से मन्त्र में इस पूरी दुनियां का सँचालन छिपा है ! शिव प्रतीक हैं -अपने अन्दर की बुराइयों पर विजय पाने का , असंभव कार्य को संभव बनाने के लिए , जैसे उन्होंने ' विषपान ' किया था ! हम भी अपने आस पास के नकारात्मक रूपी विष को ग्रहण करके उसे सकारात्मक बना कर अपने आस पास के वातावरण को सकारात्मक बना सकतें हैं ! शिव प्रतीक हैं क्षमा के - तो हम भी अपने आस पास के वातावरण में किसी के द्वारा की गई कोई भी गलती को जो क्षमा करने लायक हो क्षमा करके अपने व्यक्तित्व को ' सबका प्रिय ' बना सकतें हैं ! शिव प्रतीक हैं - सहांर के ! उनसे प्रेरणा ले कर हम भी अपने आस पास हो रहे असामाजिक कार्यों , अत्याचारों , और ऐसे ही अन्य का निर्भीक हो कर विरोध कर पाने में सफलता पा सकतें हैं ! शिव प्रतीक हैं - तपस्या के ! अर्थात सयम , एकाग्रता और लगन ! हम भी ये प्रेरणा ले कर अपने मन - मस्तिक्ष को अपने काबू में रख सकतें है ! शिव प्रतीक हैं - सुन्दरता के ! अर्थात मन की सुन्दरता ...! हम भी उनसे प्रेरित हो कर अपने मन को सुन्दर बना सकतें हैं ! यदि हम ' शिव जी ' से ये प्रेरणा ले कर अपने जीवन में पालन करें तो हमारा जीवन भी हो उठेगा ---- " सत्यम , शिवम् , सुन्दरम ..! ॐ नमः शिवाय ...! ॐ नमः शिवाय  !! ॐ नमः शिवाय !!! आप सभी को महाशिव रात्रि की हार्दिक शुभकामनाये ....आपका जीवन सफल हो , सभी खुशियाँ आपको मिलें , आपसे सब प्रसन्न रहें ..!

Tuesday, February 22, 2011

" कामनसेंस "




अंग्रेजी में एक शब्द है - " कामनसेंस " ! है तो एक शब्द ही पर ये अनेक तरह की उहा - पोह , विकट परिस्थितियों , और उलझाव में " रामबाण " के रूप में काम करता है ! " क्या तुममे कामनसेंस नहीं है कि तुम देख कर भी अंजान बन रहे हो ..? " जैसी अनेक स्थितियों को सरल बनता है ! जिन रिश्तों से हम घिरे रहतें हैं , उनमे अपनापन , कर्तव्य परायणता प्रदर्शित होती है ..! जिसे हम अज्ञानता वश " हम तुम्हारी चिंता करतें हैं ..!" आदि बातें करतें हैं , उसे मान लेतें हैं कि ये बातें हमारे भले के लिए कही जा रहीं हैं ! हमे इस बात का पता भी नहीं होता कि इन वाक्यों का वास्तविक  अर्थ क्या है .? सच तो ये होता है कि इन वाक्यों में कॉमनसेंस की कमी होती है ! तभी इस तरह के वाक्यों का प्रयोग किया जाता है .! इसलिए साधरण तरीका तो ये होना चाहिए कि हम ये ही सोचें कि जिन वाक्यों का हम प्रयोग कर रहें हैं,  कहीं उनमे " कामनसेंस ' की कमी तो नहीं हो रही ..! हमे इस बात पर गौर कर लेना चाहिए कि हमने जो कहा है उसे सुन कर सामने वाला क्या सोच सकता है ..और यही बात यदि वो कहे तो हमे कैसा लगेगा ..! बस जिस दिन हम इस बात को समझ जातें हैं उस दिन हम उस चीज से दूर हो जातें हैं - जिसे किसी भी व्यक्तित्व  के लिए " जहर "   माना जाता है और वो है - " अहम् या इगो " ! है न एकदम सरल तरीका ...साधारण रहते हुए भी असाधारण बने रहने का ..!!!!

Monday, February 21, 2011

" रिश्ते " ..!

" रिश्ते " ..! कितना अपना सा अहसास है इसमें ! मन करता है न ...कभी इस 'शब्द ' से अलग न हों हम ! कितने रंग दिखता है  न ये एक शब्द - रिश्ते ' ! हमारे मन पर पूरी तरह काबू रहता  है इस शब्द का ..! हम रिश्तों से संचालित होतें हैं न कि हमसे रिश्ते ..? परन्तु हम इस गलतफहमी में जीते हैं कि हम रिश्तों को संचालित करतें है ? जब चाहें रिश्ते हमारे मन को चाहे जिस रंग में रंगना चाहे रंग देतें हैं ..! और हम हैं कि ..अपनी खुशफहमी में खुश रहतें हैं कि ..अपने रिश्तों में हम जो चाहे रंग भर सकतें हैं ..! जब रिश्ते टूट जातें हैं तब हमे अपनी खुशफहमी की असलियत का पता चलता है ..पर  तब तक देर हो चुकी होती है न ..! हम उस समय तो इस असलियत को समझ जातें हैं पर फिर पता ही नहीं चलता कब भूल गए ..? यही तो विशेषता है इस एक शब्द  की ..जिसे हम - रिश्ते ' कहतें हैं ..! इसलिए हमे इस बात को याद रखना चाहिए न कि हम 'रिश्तों ' में केवल अपना प्यार , अपनत्व और पूरा समर्पण देना चाहिए न कि उस पर अपना काबू रखना चहिये ...जैसे ही हमने ' रिश्तों ' पर अपना काबू दिखाया कि ..पता नहीं कैसे दरार आ जाती है 'रिश्तों में' ..! ' रिश्तों ' को बांधना यानि रिश्तों में खुद से ही दरार डालने का काम कर जातें है न हम ..! इसलिए रिश्तों में जीना चाहिए ..न कि हमसे रिश्तें जियें ..!!!

Tuesday, February 15, 2011

सुन्दर महकते पुष्प

           

" फूल " ! कितने हसीं लगतें हैं ..मन को भातें हैं ..! कितनी मोहक महक होती है सुन्दर -सुन्दर पुष्पों की ..! मन कितना भी उदास होता है पर फूलों की सुन्दरता , महक मन खुश कर देती है न ..! सच में प्रकृति का नायब तोहफा है हम दुनियां में  ...कभी उदास ..कभी खुश रहने वालों के लिए ...हमेशा हँसते ..मुस्कुराते ...महकते ...- ये सुन्दर से पुष्प ...!

Monday, February 14, 2011

BEAUTY

सुन्दरता इस जहाँ की आत्मा है ! ये सुन्दरता प्रकृति की भी हो सकती है तो कलाकारों की कलाकृति की भी ..! पर सबसे ज्यादा सुन्दरता मन मोहती है नारी की ..! जाने कितने काव्य लिखे गएँ होंगे ..जाने कितने महल और भी जाने क्या - क्या ..! समय चाहे कितना बदल जाये पर ' नारी ' की सुन्दरता बदलते समय के साथ और भी निखरती जाती है .... सच में इस सुन्दरता को देखने ही तो ईश्वर भी अवतार ले कर आता रहता है ..! चाहे साधू - सन्यासी हो , या हो कोई भी सभी के मन मंदिर में एक खूबसूरत ' नारी ' की तस्वीर जरूर रहती है ..!

हमेशा मुस्काएं

मन जब खुश होता है तो कितना अच्छा लगता है ..! उस समय मन करता है न कि कभी कैसे भी उदासी न आये पास ..! पर ऐसा होता नहीं है न ..! पर हम चाहें तो हम कर  सकतें है अपने मन को हमेशा खुश ..! बस करना इतना ही है कि कैसे भी दुख क्यों न आ जाएँ ..उन्हें बहुत सोचें नहीं ...चेहरे पर मुस्कराहट बनाये रखें ! हो सकता है पहले कुछ कठिन सा लगे पर जब हम ऐसा करने की आदत बना लेंगें न ..तो कुछ भी कठिन नहीं लगेगा ..! जैसे कागज़ ...पेन ..पेंसिल ...मिटटी ...आदि चीजें कभी मुस्कुरातीं हुई दिखतीं हैं ? नहीं न ...! पर जब कागज़ पर पेंसिल से कोई मुस्कुराती तस्वीर बना लें तो मनो कागज़ भी मुस्कुराता सा लगता है ..! ऐसे ही मिटटी से कोई मुस्कुराता बुत बना ले तो मुस्कुराती है मिटटी भी ..! और सभी को खुश रहना ..मुस्कुराना अच्छा लगता है न ..! चाहे अपने प्यार का मुस्कुराना हो ...!!! है न ...तो हमेशा मुस्कुराने से कोई भी कठिन काम तो आसां हो जाता है साथ ही कठिन समय भी हँसतें - हँसतें बीत जाता है ..! वैसे भी सभी मुस्कुराती यादें सहेजना चाहतें  हैं न......!

Sunday, February 13, 2011

मीठी यादें जियें..!

हमारे जीवन में कितने ही पल आतें हैं जब मन प्रसन्न होता है ...सब कुछ अच्छा - अच्छा लगता है ! उस समय मन करता है न कि ये सब बना रहे साथ ही ..! चारों ओर सब कुछ महकता सा लगता है ..लगता है जैसे हवाएं मधुर गीत गुनगुना रहीं हों ..! मौसम मुस्कुरा रहा हो ..! वातावरण हसीं ..रंगी ..सा महसूस होता है ..! तब मन कह उठता है न ..- वाह ! कितना सुन्दर ये जीवन है ..कितना अच्छा समय है ..!! है न ...अपने भी महसूस किया होगा न अपने जीवन में ऐसा ...कुछ कभी तो ...किसी मोड़ पर ...या किसी के साथ ..!!! अच्छा लगता है न ये सब याद करना ....! इसलिए अच्छी - मीठी यादों को ..याद करके जियें अपना जीवन ..और कहें ....वाह ! कितना सुन्दर है ये जीवन अपना ...अनमोल ...प्यारा सा ..अपना ...!!!

" जीवन की डोर - ' रिश्ते ' !"



 रिश्ते ", जीवन की डोर को बांधे रहतें है मन से ..दिल से ..भावनाओं से...! शब्दों में नहीं बांध सकते रिश्तों को ..! इन्हें तो सिर्फ महसूस किया जा सकता है ..जिया जा सकता है ..! विश्वास की जमीं पर खिलतें है रिश्ते ...! जीवन के हर पल को महक देतें हैं रिश्ते ..! समय रिश्तों को मजबूत बनता है तो समय ही रिश्तों को भुलाने में सहायता भी करता है .! हाँ केवल होता इतना है कि कुछ रिश्ते मन को अन्दर तक छू जातें है तो कुछ केवल औपचारिक ही रह जातें हैं ! जीवन का आरम्भ भी इनसे होता है और जीवन के बाद भी यही याद भी रह जातें हैं ! साथ बिताये पल ...की गई मीठी - प्यारी सी बातें ..इन्हें अनेक रंग देतीं है ..इन्हें याद करने से मन महक सा जाता है ..! कभी - कभी मन करता है न ..यह सदा बने रहें साथ ..ठीक वैसे ही जैसे परछाईं बनी रहती है साथ ...! जैसे अँधेरे में परछाई साथ छोड़ जाती है उसी तरह कुछ रिश्ते भी साथ छोड़ जातें हैं ..जीवन के कुछ -एक मोड़ों पर ..! प्रयास यही होना चहिये कि - ' बनाये रिश्तों को प्यार , अपनत्व और सकारात्मक भावनाओं के सहारे ऐसे कि कभी इनमे कोई दरार न आने पाए ..कभी बिछड़ने पर आँखों में ..मन में ..दुख न आने पाए ..! '

" प्यार : जीवन की अनोखी अनुभूति "

                                                                                         
"प्यार " सिर्फ शब्द नहीं ..बल्कि समाया है इसमें ऐसा संसार ..जो खुशियों से महकते उपवन भी देता है, और दुख के आसुओं से लबालब सागर भी ..! हाँ होता है केवल इतना कि हमारा प्यार किस आधार पर है ..विश्वास पर या सिर्फ स्वार्थ पूर्ति पर ..! इस शब्द " प्यार " को व्यक्त करने का न तो कोई समय होता है न ही कोई अवसर ...? क्योंकि कहा भी गया है न - " प्यार किया नहीं हो जाता है ..!" तो जब ऐसा होता है तो व्यक्त करने लिए समय या दिन का इंतजार करना ..उचित नहीं होता न ..! क्यों कि हर प्यार करने वाला चाहता है न कि उसका प्यार ' नाराज़ ' न हो किसी भी तरह ..! है न ..! कभी - कभी ऐसा भी होता है कि हम अपने जीवन साथी के साथ रहतें तो हैं ..पर मन ही मन कुछ ' खालीपन ' सा महसूस होता है ? यही खालीपन इस बात का प्रतीक होता है है हमे ' प्यार ' की अनुभूति नहीं हुई ..! वैसे भी सभी को 'प्यार ' की अनुभूति हो यह जरूरी नहीं होता ! जैसे सभी को ' ईश्वर भक्ति ' करने का अवसर नहीं मिलता ..! हाँ जिसने " प्यार " की अनुभूति कर ली जब भी ..जीवन के किसी भी मोड़ पर ..उम्र के किसी भी पड़ाव पर ..उसे लगता है उसका जीवन धन्य हो गया ..! सच में ' प्यार ' केवल अहसास नहीं है वह तो साक्षात् ईश्वर का वरदान है ..!
" आप सभी को 'वेलेनटाईन डे ' की हार्दिक शुभकामनायें ..! ईश्वर करे आपके जीवन की बगिया में प्यार की महक बिखेरते पुष्पों के रंग सदा खिले रहें ..! आप सदा प्रसन्न रहें ...मुस्कुरातें रहें ...सभी आपको चाहें ...!"

Saturday, February 12, 2011

A FRIEND LIKE YOU

Everyone should have a friend like you,
You are so much fun to be
with And you are such a good person.
You crack me up with laughter
And touch my heart with your kindness
You have a wonderful ability
To know when to offer advice
And when to sit in quiet support
Time after time You've come to my rescue
And brightend so many Of my routine days
And time after time I've realized how fortunate
I am that my life includes you
I really do believe that
Everybody should have a friend like you
But so far it looks like You are one of a kind!

Friday, February 11, 2011

जब मन में ख़ुशी ,उल्लास और मस्ती आती है तो लगता है ...चारों तरफ मुस्कराहट का वातावरण बन गया है .! इस मुस्कराहट में हम अगर अपने सामान्यपन को बनाये रख सकें तो ये वातावरण हमेशा बना रहता है ! शायद सभी ऐसा ही चाहतें है न ! इस दुनियां में जितने भी त्यौहार आतें हैं उनका यही एकमात्र उद्देश्य होता है ! अब चाहे भारतीय त्यौहार हों या अन्य किसी देश में ..! इन त्योहारों के इस मर्म को समझ कर उसका अपने मन के अनुसार आनंद  ले तो ...कितना अच्छा लगता है ..! यह कोई जरूरी नहीं कि " लकीर का फकीर " बन कर किसी अन्य त्यौहार को मनाया जाये ! अपने मन के अनुसार उसकी महत्ता समझ कर मनाये तो हमारे चारों तरफ सदा ख़ुशी , प्रसन्नता का वातावरण बन रहेगा न .

Thursday, February 10, 2011

जब दिल उदास हो जाता है तो यादें मन को दूर सा कर देतीं है न इस दुनियां से ...अपने आप से ...! मन यादों में इस कदर खो सा जाता है की कब आखों से आसूँ निकल जातें है इसका अहसास ही नहीं होता ..! बस अंगुलियाँ अपने आप उन आसूँओं की बूंदों को हटा देतीं है ..! उस समय लगता है न सब तरफ उदासी छा गई है ..! मन भारी - भारी सा हो उठता है ..! सच में प्यार में साथ है तो सब अच्छा - अच्छा लगता है पर जुदाई आ जाये या बिछुड़ना पड़े तो ..." बादल भी आसूं बहता है ..जमीं के दिल पर यादें बन जातें है आसूं ..!!"

Tuesday, January 18, 2011

" हम भारतीय हैं "

          
                                                             
                 " भारत हमारी जान है , और हमारी पहचान है !
                               अपने आप को भारतीय कहना हमारी शान है !!"