Wednesday, November 17, 2010

" तुम्हारा महकता सौंदर्य "

" सुकोमल सा ,
ओस भीगे पुष्प सा -
तेरे गुलाबी मुखड़ा महकता है !

नव -प्रभात सा ,
प्रसन्नचित रश्मिओं सा -
तेरी आँखों में प्यार लरजता है !

स्वर्ण -चमक सा ,
रत्न -स्फूटित किरणों सा -
तेरा कोमल शारीर दमकता है !

मदमोहक अदाओं सा ,
शीतल मंद -मंद पवन में ,
डोलती सी डाली सा -
तेरा रंग सौंदर्य मन मोह लेता है !

कोयल की कूक सा ,
कर्णप्रिय संगीत तरंगों सा -
तेरा वाणी सौंदर्य मन बांध लेता है !

चहकना चिड़ियों का ,
स्वच्छ विचरण मनहरण मृग सा ,
तेरा नाम -
मेरी हर धड़कन पर लिख देता है !"

" -- मनु "

1 comment:

  1. एहसास की यह अभिव्यक्ति बहुत खूब

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