Saturday, February 12, 2011

" आरजू "





जान कर भी वो मुझे जान ना पाए ,
आज तक वो मुझे पहचान ना पाए !
खुद ही कर ली हमने बेवफाई ,
ता कि उन पर कोई इलज़ाम ना आये !
नाकाम सी कोशिश किया करतें हैं ,
हम हैं कि फिर भी उनसे प्यार करतें हैं !
खुदा ने किस्मत में टूटा तारा भी नहीं लिखा ,
और हम हैं कि चाँद की आरजू किया करतें
हैं !
                                       

1 comment:

  1. आपकी यह ब्लाँग पोस्ट बहुत ही अच्छी लगी ,आभार ।

    सुप्रसिद्ध उपन्यासकार और ब्लाँगर नन्दलाल भारती जी का साक्षात्कार पढने के लिए यहाँ क्लिक करेँ>>

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